अध्याय 9 सभी लाभ चाहते हैं

एंडी और नोआ ने एक-दूसरे की तरफ देखा, आह भरी और मुँह फेर लिया, मगर उनकी छोटी उँगलियाँ अब भी एम्मा की उँगलियों से जुड़ी रहीं।

बाक़ी पूरा दिन एम्मा एंडी और नोआ के साथ ऐसे चिपकी रही जैसे गोंद।

जेम्स वाले तमाशे के बावजूद, एंडी और नोआ को एम्मा सच में अच्छी लगती थी।

ख़ासकर आज उसे अकेला छोड़ दिया गया था, ये देखकर उन्होंने पक्का किया कि उसे अपने खेल में शामिल रखें—और तीनों ने मिलकर खूब मस्ती की।

वक़्त देखते-देखते निकल गया, और किंडरगार्टन खत्म होने का समय आ गया। एम्मा को लेने जेम्स ख़ुद आया।

“एम्मा, चलो घर चलें।” उसने उसे गले लगाने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन एम्मा झट से बच गई और जैसे उसकी मौजूदगी को नाम भर भी नहीं माना।

उसकी जगह वह एंडी और नोआ के पास ही सटी रही, चेहरे पर साफ़ अनिच्छा झलक रही थी।

एंडी और नोआ जेम्स को उसके बदतमीज़ पिता के तौर पर जानते थे। उन्होंने उसे नफ़रत भरी नज़रों से देखा, शार्लेट के साथ उसने जो किया था वह याद करके।

एम्मा की नज़र का पीछा करते हुए जेम्स ने एंडी और नोआ को देखा। चेहरे जाने-पहचाने लगे, मगर उसे समझ नहीं आया कि क्यों।

उसके दिल में अजीब-सी खुशी की चिंगारी-सी फूटी—जैसे बिजली का हल्का झटका—और उसका मन हुआ कि वह एंडी और नोआ के पास चला जाए।

मगर उनकी आँखों में तिरस्कार देख, जेम्स को थोड़ा अपमान लगा। उसने उन्हें नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया, पर मन खट्टा हो गया।

एंडी पानी की पिचकारी से खेल रहा था। उसकी नज़र जेम्स पर पड़ी तो उसके दिमाग में एक शरारत सूझी। उसने जेम्स के चेहरे पर पानी छिड़क दिया, और जेम्स एकदम बेवकूफ़-सा लगने लगा।

अपनी बड़ी-बड़ी मासूम आँखें झपकाते हुए एंडी ने बनावटी ढंग से माफ़ी माँगी, “ओह! सॉरी। मेरा मतलब नहीं था। आप किसी बच्चे से तो बैर नहीं रखेंगे, है ना?”

जेम्स का गुस्सा भड़क उठा, लेकिन उसी पल एम्मा ठहाका मारकर हँस पड़ी।

एम्मा को इतने साफ़ तौर पर भाव दिखाते देखना दुर्लभ था, और जेम्स का गुस्सा तुरंत गायब हो गया।

ऊपर से एंडी ने माफ़ी माँग ही ली थी, तो जेम्स के पास बात छोड़ देने के अलावा कोई चारा नहीं था।

असल में, एंडी और नोआ को देखकर जेम्स उन्हें सज़ा देना भी नहीं चाहता था। उनकी खुली दुश्मनी उसे सबसे ज़्यादा असहज कर रही थी।

एम्मा को इतना खुश देखकर जेम्स ने सोचा, थोड़ी देर और यहीं रुक जाता हूँ।

उसी वक़्त शार्लेट आ गई, और उसने ये सब देख लिया।

उसका दिल कस गया। वह तेज़ी से आगे बढ़ी और एंडी व नोआ के सामने ढाल बनकर खड़ी हो गई। “तुम दोनों ठीक हो? सॉरी, मुझे देर हो गई। चलो, अब घर चलते हैं,” उसने कहा—उसकी तीखी नज़रें चौकन्नी होकर जेम्स को जाँच रही थीं।

असल में, उसके इतना घबराने के लिए उसे दोष नहीं दिया जा सकता था। बात बस इतनी थी कि एंडी और नोआ जेम्स के बचपन वाले रूप से कुछ ज़्यादा ही मिलते-जुलते थे।

जेम्स ने तो ध्यान नहीं दिया था, लेकिन कोई ऐसा इंसान जो उसे बचपन से जानता हो, अगर उन्हें देख ले, तो एंडी और नोआ की पहचान खुल सकती थी।

और तब मार्टिन परिवार ज़रूर बच्चों को वापस ले जाने की कोशिश करता।

शार्लेट ऐसा होने नहीं दे सकती थी।

जेम्स को समझ नहीं आया कि मामला क्या है, मगर शार्लेट का तना हुआ चेहरा देखकर उसका मन और ज़्यादा बिगड़ गया।

वह इतने साल आज़ाद रही—उसे और एम्मा को पीछे छोड़कर।

अब उसके पास दूसरे बच्चे थे, और वह उन्हें बचाने में इतनी सतर्क थी।

उसने एम्मा की तरफ देखा, जो चुप थी, और उसके दिल में चुभन हुई। शार्लेट को देखने वाली उसकी नज़र गुस्से से कठोर हो गई।

लेकिन बच्चों के सामने उसे अपने जज़्बात काबू में रखने पड़े।

स्कूल से बाहर निकलते हुए शार्लेट ने जेम्स को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया। दरवाज़े तक पहुँचकर उसने राहत की साँस ली।

उसने एंडी और नोआ से कहा, “ठीक है, अब एम्मा को बाय बोल दो।”

एंडी और नोआ ने आज्ञाकारी होकर एम्मा को अलविदा कहा।

वे जाने ही वाले थे कि जेम्स अपना गुस्सा रोक नहीं पाया और शार्लेट से सवाल कर बैठा। “शार्लेट, तुम कितनी पत्थरदिल हो। इतने सालों से मज़े में जी रही हो?”

शार्लेट को समझ नहीं आया कि जेम्स कहना क्या चाहता है; उसे लगा वह बेकार की बातें कर रहा है।

जेम्स को अनसुना करके वह वापस कार में बैठ गई।

ड्राइव करते हुए उसने अपनी उदासी को दबा लिया और सामने सड़क पर ध्यान लगा दिया।

एंडी और नोआ ने एक-दूसरे को देखा; जेम्स के लिए उनकी नफ़रत और गहरी हो गई। साफ़ था, जेम्स को जो छोटा-सा सबक उन्होंने सिखाया था, वह काफ़ी नहीं था। अगली बार वे ज़रूर उससे और सख़्ती से बदला लेंगे।

घर लौटते समय, शार्लट ने आगे की परेशानियों से बचने का एक तरीका सुझाया। “मेरे लाडलों, क्यों न मैं तुम्हें किसी दूसरे किंडरगार्टन में ट्रांसफर करा दूँ?”

लेकिन एंडी और नोहा के दिमाग में तुरंत एम्मा का चेहरा आ गया। अगर वे चले गए, तो वह दुखी हो जाएगी और उसे तंग किया जाना भी जारी रहेगा।

ऊपर से, जेम्स से हिसाब बराबर करने की उनकी योजना अभी बाकी थी। वे यूँ ही बात को छोड़कर नहीं जा सकते थे।

इसलिए दोनों ने शार्लट की बात सख्ती से ठुकरा दी।

एंडी बोला, “मॉम, हमें यही किंडरगार्टन बहुत पसंद है। हम ट्रांसफर नहीं करना चाहते। एम्मा के पापा ने जो कहा, उसकी चिंता मत करो। उदास मत हो। वो बदतमीज़ इसके लायक नहीं है।”

शार्लट ने उनकी राय का सम्मान किया, तो जब उन्होंने नहीं माना, वह बस धीरे से बोली, “ठीक है। मेरे लिए सबसे ज़रूरी तुम्हारी खुशी है।”

शार्लट मान तो गई, लेकिन जेम्स के सवालों को याद करते ही उसके भीतर का गुस्सा सुलगने लगा।

जेम्स के तो किसी दूसरी औरत से बच्चे हैं—फिर उसे शार्लट से सवाल करने का हक किसने दिया?

शार्लट ने मन ही मन कहा, “कितना घटिया इंसान है—फायदे सारे चाहिए! सपने देखता रहे!”

घर पहुँचकर भी शार्लट को उपकरण सप्लायरों और जड़ी-बूटी सप्लायरों से निपटना था।

नए प्रोजेक्ट और रिसर्च के लिए ढेर सारे उपकरण और जड़ी-बूटियाँ चाहिए थीं, जो वेरिटास इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल इनोवेशन की पहले की रिसर्च दिशा से बिल्कुल अलग थीं। पुराने सप्लाई चैनल साथ नहीं दे पा रहे थे, खासकर जड़ी-बूटियों के मामले में।

वेरिटास का पुराना सप्लायर सिर्फ औषधीय जड़ी-बूटियों के एक्सट्रैक्ट देता था। कच्ची जड़ी-बूटियाँ उन्हें दूसरी कंपनियों से जुटानी पड़तीं।

एलेक्स ने पहले उनसे बात की थी, लेकिन जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता उनकी रिसर्च के लायक नहीं थी।

शार्लट ने लैपटॉप निकाला और काम में लग गई।

जड़ी-बूटियों के सप्लायरों में, एल्डोरिया में सबसे पहली पसंद लिन ग्रुप था—डेज़ी के परिवार का कारोबार।

लेकिन पिछली बातों का खयाल आते ही शार्लट ने अनायास ही उस विकल्प को नकार दिया। वह लिन ग्रुप के साथ काम नहीं करना चाहती थी।

शार्लट समझौता नहीं करना चाहती थी, इसलिए उसने विकल्प ढूँढना शुरू किया—सिर्फ एल्डोरिया तक खुद को सीमित नहीं रखा।

शहर में लिन ग्रुप का दबदबा था, मगर एल्डोरिया के बाहर बेहतर सप्लायरों की ज़रूरत थी।

वैसे भी, उपकरणों के लिए शार्लट के पास अपने चैनल थे। आखिर एंडी और नोहा इस मामले में बहुत निपुण थे।

बचपन से ही उनमें इस क्षेत्र की गजब की प्रतिभा थी, और कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय मेडिकल उपकरण निर्माताओं का समर्थन भी उन्हें पहले ही मिल चुका था।

शार्लट ध्यान से जड़ी-बूटी सप्लायर चुन रही थी कि तभी उसका फोन बज उठा।

देखे बिना ही उसने आदतन कॉल उठा ली। “हैलो, मैं शार्लट बोल रही हूँ। कौन बोल रहा है?”

दूसरी तरफ सन्नाटा था—कोई जवाब नहीं।

शार्लट को अजीब लगा और उसने स्क्रीन देखी। कॉल अब भी कनेक्ट थी।

वह दोबारा पूछने ही वाली थी कि उसकी नज़र नंबर पर टिक गई।

छह साल बाद भी, यह नंबर उसे साफ-साफ याद था।

यह जेम्स का नंबर था।

उसे उम्मीद नहीं थी कि छह साल बाद भी उसके पास वही नंबर होगा।

शार्लट की लंबी चुप्पी से जेम्स समझ गया कि वह पहचान गई है।

उसने ठंडी हँसी छोड़ी, आवाज़ में कुटिलपन था। “शार्लट, तुम्हें क्या लगता है मैं कौन हूँ?”

वाकई, उसने उसे फोन किया था।

एक पल को उदासी की लहर उसके भीतर से गुज़री, लेकिन तुरंत ही उसकी जगह तंज ने ले ली।

शार्लट बोली, “जेम्स, एक बात है जो तुमने पहले भी सुनी होगी।”

तलाक से पहले उसने उसे न जाने कितनी बार फोन किया था, और उसने कभी उठाया नहीं—उसे कॉल करना तो दूर की बात थी।

अब हालात पलट चुके थे, और शार्लट को जेम्स की खुशामद करने की कोई जरूरत नहीं थी।

यह तर्क ही बेमानी था!

“एक्स को ऐसे मानना चाहिए जैसे वे मर चुके हों, तो जेम्स…” शार्लट ने हर शब्द साफ-साफ कहा, जैसे उसे जेम्स की परवाह ही न हो।

“मेरे लिए तुम पहले ही मर चुके हो। मरे हुए लोगों को अपनी कब्र से रेंगकर बाहर नहीं आना चाहिए!” यह कहकर उसने फोन काट दिया।

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